लेखनी कविता -11-Feb-2022 (प्रकृति का स्वरूप )

10 Part

230 times read

6 Liked

सुंदर आच्छादित  मन को हर्षाता मंत्रमुग्ध  करे  प्रकृति  का स्वरूप अरुणोदय हुई तो खिली कलियां और पवन, जल–धारा बहे समरूप सुंदर बड़ा धरा की छटा अरु स्वरूप वसुंधरा की माटी देती ...

×